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मुखड़ा अर दरपण

चित्र : नवीन अमीन
मंगळौ अर किसतूरी ब्याव कर‘र आयां जद वैं ईसर अर गंवर दांई लागै हा। बीयां उणरै घरवाळा हेताळूं-बैळी सिघळां आ बात कैह्य रह्या हा। मंगळौ ही इण बांत नै जाणतौ हो कै किसतूरी ही घणी फूंठरी है। वीरौं मोवणौ, मुखड़ौ गौरी चामड़ी, सुआं कैरी नाक, मृगलोचणी आंख्यां, मदमस्त हथणी-सी चाल। किसतूरी आ बांत जाणती ईं कै मंगळौ ही घणौ फूठरौ है-चौवड़ौ कंधां, तेजस्वी ललाट, नसीळी आंख्यां, काजळ री तरै काळा भंवर केसर अर गुळर भांत गुळाबी गाळ।