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कन्हैयालाल भाटी री कहाणियां
संचै : नीरज दइया
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कन्हैयालाल भाटी
जलम :
4 जुलाई, 1942
निधन : 1
4 जनवरी, 2012
भणाई :
एम.ए.(हिंदी), बी.एस.टी.सी.
व्यवसाय :
अध्ययन-अध्यापन। शिक्षा विभाग, राजस्थान री चावी-ठावी पत्रिकावां- ‘शिविरा’ (मासिक) अर ‘नया शिक्षक’ पेटै बरस 1967 सूं 1996 तांई सहायक रै रूप मांय कारज अर शिक्षा विभाग, राजस्थान सूं बरस 2000 मांय सेवानिवृत्ति पछै लगोलग लेखन अर उल्था।
प्रकासण : साप्ताहिक हिंदुस्तान, सारिका, रविवार, नवनीत, श्रीवर्षा, भाषा, समकालीन भारतीय साहित्य, योजना, आजकल, पराग, नंदन, बालभारती, बालहंस, दैनिक हिंदुस्तान, जनसत्ता, राष्ट्रीय सहारा, कंचन प्रभा, वातायन, मधुमति, इंद्रप्रस्थ भारती, राजस्थान पत्रिका, इतवारी, समाज-कल्याण, कहानीकार, हंस, दिनमान, शिविरा, नया शिक्षक, माणक, जागती जोत, बिणजारो, नैणसी आद पत्र-पत्रिकावां मांय अलेखूं कहाणियां, कवितावां, नाटक-लेख आद रचनावां रा बरसां सूं राजस्थानी-हिंदी उल्था प्रकासित हुवता रैया है। इण संग्रै में छपी कहाणियां रै अलावा दोय सौ सूं बेसी उल्था अर बीसूं कवितावां-लेख आद मौलिक रचनावां पत्र-पत्रिकावां मांय प्रकासित।
पोथ्यां रा उल्था :
‘उसके लिए’
(गुजराती उपन्यास, डॉ. नगीन मोदी), सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार सूं पुरस्कृत कृति
‘आतस’
(गुजराती उपन्यास, वर्षा अडालजा),
‘आओ प्रयोग करें’
(चार भाग) गुजरात सरकार कानी सूं पुरस्कृत,
‘एक दुनिया मेरी भी’
(राजस्थानी कहाणी-संग्रै, सांवर दइया) साहित्य अकादमी, नई दिल्ली कानी सूं पुरस्कृत अर प्रकासित, ‘क्षांत्यानंद दक्षादेवी चरित्र अर्थात नारी उत्कर्ष’, ‘श्री क्षांत्यानंद गुणमंजरी महासती चरित्र’, ‘बुबलाबू झून झून झूं’ (बाल नाटक) मुद्रणस्थ।
ठावौ ठिकाणौ :
कुंनी निवास, छींपां रौ मोहल्लौ, गंगाशहर रोड, बीकानेर (राजस्थान)।
कानाबाती :
0151-2523043
पोथी-परिचै
कन्हैयालाल भाटी री कहाणियां
संचै : नीरज दइया
प्रकाशक : बोधि पकाशन,
एफ-77, सेक्टर 9, रोड नं. 11,
करतारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया,
बाईस गोदाम, जयपुर- 302006
मोल : 60/-
संस्करण : दिसम्बर, 2011
ई-मेल : bodhiprakashan@gmail.com दूरभाष : 0141-250389, 98290-18087
संचै : नीरज दइया
कन्हैयालाल भाटी री कहाणियां
संचै : नीरज दइया neerajdaiya@gmail.com
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चित्र : मोहनलाल जावा
जोधपुर रै ठैसण माथै अेक-दूजै नै आमै-सामै देख‘र अचरज में पडयां बौल उठयां, ‘थूं’ ? जेठ रै तपतै तावड़ियै रो दौपेरी रौ बखत हो। सपना नै मुंबई जावणौ हो, जदकि तिरलोक हाउड़ा सूं आयी गाड़ी सूं उतरयो हो। ठैसण री भीड़ बीचाळै दोनुं जणा होस-हवास गुमायौड़ा उभां हां। आसै-पासै सौर-सराबै सूं अणजाण हुयोड़ा ठैसण रै
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डॉ. मदनगोपाल लढ़ा
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